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Wednesday, 10 October 2018

राम,रामायण,रामलीला - गांवों की तरफ

Suman Krishnia

राम,रामायण,रामलीला - गांवों की तरफ
1960 के दशक में एक project शुरू किया गया था,जिसके तहत रामलीला मंचन का रूख गांव व कस्बों की तरफ किया गया था,उससे पहले राम लीला मंचन कुछ मुख्य शहरों तक ही सीमित था। इस प्रोजेक्ट को गांव कस्बों की तरफ ले जाने के पीछे तर्क था- गांवों व कस्बों में राष्ट्भक्ति व एकता की भावना जाग्रत करना ( यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पहले, दूसरे विश्वयुद्ध में ज्यादातर सैनिक गांव कस्बों से थे, तथा आजाद हिंद फौज के सैनिक भी उन्हीं मे से थे, तो यह तो बहुत सामान्य बात थी की ग्रामीण भी देश,आजादी व राष्टृयिता से वाकिफ रहे होंगे ) ।
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इस प्रोजेक्ट के प्रेणेता थे, डाँ राम मनोहर लोहिया। इसके संदर्भ आपको मिलेंगे उनके राजनितिक सचिव ,श्री भटनागर द्वारा लिखित बायोग्राफी में