विचार की ताक़त बेमिसाल होती है। --- प्रो. एच. आर. ईसराण विचार की काट विचार से ही होती है। तलवार और गोली विचारों की क़त्ल करने में नाकाम रहती हैं। दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है।
तंग दायरों में कैद रहने को उकसाने वाला सोच कभी सही सोच नहीं हो सकता। जड़ता का जनक होता है ऐसा सोच। निष्ठुरता को पोषित करता है ऐसा सोच।
परस्पर विरोधी विचारों को समझने से ही सत्य का मार्ग आलोकित होता है। पता नहीं कौनसा विचार कब दिमाग की बंद खिड़कियों को खोल डाले। जब परस्पर विरोधी विचारों के बीच दिमाग़ में जंग छिड़ जाए तो समझो कि द्वंद का समाधान अब नजदीक है। बिना राग- द्वेष के सोच-विचार करेंगे तो हम अपने को इंसानियत के हितैषी विचार के समर्थन में खड़ा पाएंगे। दकियानूसी सोच के दायरे घुटन भरे होते हैं। कुछ वक़्त मुक्त विचारों की खुली हवा में सांस लेकर तो गुजारिए। ताजग़ी का एहसास होगा।