शहीद होने के बाद, परिवार की हकीकत -
एक नजरजब एक सैनिक के शहीद होने के पश्चात जब उसका भौतिक शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ पैतृक घर आता है तब परिवार पर गुजरने वाली स्थिति से हम वाकिफ हैं।
एक नजरजब एक सैनिक के शहीद होने के पश्चात जब उसका भौतिक शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ पैतृक घर आता है तब परिवार पर गुजरने वाली स्थिति से हम वाकिफ हैं।
अंतिम संस्कार के वक्त प्रशासनिक रश्मो के अलावा स्थानीय नेता औपचारिकता पूरी करते है- सामाजिक व राजनीतिक जरूरतों के मुताबिक तथा कुछ सामान्य जाने माने शब्दों का उदगार जैसे की - वीर पर्सूता भूमि, वीर नारी, शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता, शहीद परिवार की हर संभव सहायता की जायेगी इत्यादि इत्यादि।
मिडिया प्रतिनिधि अखबारों में छापेंगे - शहीदों का गांव, शहीद के माता पिता ने कहा हम अपने दूसरे बेटे को भी सेना में भेजेंगे, विधवा पत्नि ने कहा मैं अपने बच्चों को बडा़ होने पर सेना में भेजूंगी वगैरह वगैरह।